Tuesday, June 10, 2008

तुम..

खोया खोया मन एक साथ चाहता है,
अकेले रहते जो थक गया है तो आज किसी के फिर होने की आरज़ू रखता है|
किसी का साथ ना देने पर इल्ज़ाम है,
शायद कुछ ना कर पाने का ही तो ये आज तक मलाल है|
मन से उसे याद करने का एहसास तो होता है,
क्या मेरी याद के भी मायिने कोई समझ पाता है?
कोई एक पल कहने में भी सकुचाता है,
और कभी उमर भर का हक़ दो तो भी हाथ अकेला छूट जाता है|
हर दिन सोचते कि हर पल साथ रहना है,
अब साल ही पूरा दो भागों में बँटा नज़र आता है..
एक जब हम कुछ कह दें और बाकी उसका जवाब रह जाता है..

4 comments:

DR.ANURAG said...

अच्छे अहसास है ...बस थोड़ा refine कर दो....कुछ ख्याल बेहद खूबसूरत है.....

Chhiyaishi said...

aapke jitta khoobsoorat aata hota kya hi baat thi :) will sure try, thnx.

flyingstars said...

kya baat hai...wakei ehsaas bahut badiya hai jo dil ko chu jata hai aur mehsoos karne ko majboor kar deta hai...bahut khub!

Chhiyaishi said...

:) padhne wale ki bhi nazar ka fark hota hai..