Monday, August 25, 2008

वक़्त फिसल रहा है..

Solitude
ज़िन्दगी बहुत कुछ देती है तो छीन भी लेती है..आज एक और हक भी चला गया..

बहुत फर्क आ जाता है कुछ ही सालों में, कुछ मेरा था हमेशा..

और आज उसे अपना कह देने पर सवाल है
दिन फिरते वक़्त नहीं लगता..बहुत भारी मन है, आखें भीगकर भी सूखी है पर सन्तुष्ट हैं.

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