Monday, December 1, 2008

एहसास प्यार का


अजीब होता है प्यार का जज़्बा, कुछ माँगता नही ना मिले तो
बस दिये जाना चाहता है, अगर कोई लेना ना चाहे तो भी
तुम्हें भूल कर भी भुलाने को जी नही करता
तुम भूल गये हो फिर भी तुम्हारा हाल पूछना लगता है ज़रुरी
तुम्हें भूल कर भी तुम्हारी हँसी आँखों से नहीं जाती
ना अब तुम पलट के मेरी तरफ मुसकुराओगे कभी लेकिन फिर भी
महसूस करती हूँ तुम्हारी पलकें, अपनी पलकें बन्द करके भी
मन में खयाल आते हैं तुम्हारे, सही न लगे फिर भी
बहाने से बोलती हूँ तुम्हारे बारे में, जो बैठती हूँ अजनबी के साथ भी
तुम हो नहीं पास, वो लम्बे दौर बातों के चल न सकेगें कभी
पर सभी बातें याद हैं, छोटी से छोटी भी
ये लिख रही हूँ की भुलाया नहीं जाता पर क्या भूल सकी हूँ आज भी
ये दिन, यही दुख और यह वक़्त जब बने थे ज़िन्दगी उसकी
तब क्या हाथ बढाके सम्भाल सकी थी?
पर फिर भी, बहुत मुश्किल से थामें रखी है डोरी इस प्यार की.

5 comments:

bhoothnath said...

पर फिर भी, बहुत मुश्किल से थामें रखी है डोरी इस प्यार की..........magar is dor ko thaam kar rakhnaa hi hotaa hai...kyunki iske bagair jindgi bhi to nahin hoti....!!

Anonymous said...

Hur kisie ko nahin milta yanha pyar jindagi maine
Kuch khush nasseb haine jinke pass haine yeah ehsas jindagi maine
Jinda to haine hum aaj …magar jee rahe haine unheen palon maine
Aankhen dekhteen to haine aaj .. magar nazare sirf tumharhe haine unme
Shayad chale jana pade is janha se chahat liye tumharhe deedar keen … magar fhir na ayenge is janha maine agar saath na de khudha tumharha to

Chhiyaishi said...

how b'ful..thanks

Neelendra Singh Kushwah said...

awesome

Chhiyaishi said...

thanks Neelendra..